
मेरे गीत मेरी कलम खो गई
मेरे सपनों कि दुनिया भरम हो गई
मैंने चाह बहुत मुझको साँसे मिलें
रुख बदल के हवाएं कहाँ खो गईं।
मुझको खामोशियों से मोहोब्बत हुई
मझपे मेरे खुदा की इनायत हुई
मैंने चाह मोहोब्बत से इकरार हो
हो गई चुप जुबां तो कयामत हुई।
मेरी आँखों का पानी हवा हो गया
मेरा हर दर्द मेरी दावा हो गया
धूप मे चलते चलते जो ठोकर लगी
मेरा साया भी मुझसे खफा हो गया।
फिर भी जिंदा हूँ मैं और जियूंगी अभी
झूमके मै के प्याले पियूंगी अभी
अपनी पैनी नज़र से खुदा देख ले
मैं मुकद्दर की कतरन सियूंगी अभी।
मुझमे बाकी हैं साँसें अभी और भी
मुझको लिखनी हैं ग़ज़लें अभी और भी
ये तेरा नूर-ऐ-कुदरत सलामत रहे
मुझको गिनने हैं तारे अभी और भी।