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रविवार, 25 अप्रैल 2010




मेरे गीत मेरी कलम खो गई

मेरे सपनों कि दुनिया भरम हो गई

मैंने चाह बहुत मुझको साँसे मिलें

रुख बदल के हवाएं कहाँ खो गईं।


मुझको खामोशियों से मोहोब्बत हुई

मझपे मेरे खुदा की इनायत हुई

मैंने चाह मोहोब्बत से इकरार हो

हो गई चुप जुबां तो कयामत हुई।


मेरी आँखों का पानी हवा हो गया

मेरा हर दर्द मेरी दावा हो गया

धूप मे चलते चलते जो ठोकर लगी

मेरा साया भी मुझसे खफा हो गया।


फिर भी जिंदा हूँ मैं और जियूंगी अभी

झूमके मै के प्याले पियूंगी अभी

अपनी पैनी नज़र से खुदा देख ले

मैं मुकद्दर की कतरन सियूंगी अभी।


मुझमे बाकी हैं साँसें अभी और भी

मुझको लिखनी हैं ग़ज़लें अभी और भी

ये तेरा नूर-ऐ-कुदरत सलामत रहे

मुझको गिनने हैं तारे अभी और भी।

12 टिप्‍पणियां:

Pandit Kishore Ji ने कहा…

behad prabhavshali

swati ने कहा…

mamma ki beti..vry very power full dear

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मुझमे बाकी हैं साँसें अभी और भी
मुझको लिखनी हैं ग़ज़लें अभी और भी
ये तेरा नूर-ऐ-कुदरत सलामत रहे
मुझको गिनने हैं तारे अभी और भी

वाह कमाल की नज़म .. हमें भी आपकी ग़ज़लें और सुन्नी हैं ....

Shreya ने कहा…

waah ...mast hai...maine actually first tym itni acchi hindi poems dekhi hain...

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

मुझमे बाकी हैं साँसें अभी और भी
मुझको लिखनी हैं ग़ज़लें अभी और भी..

क्या बात है.. खुदा करे आप ऐसे ही लिखती रहे..

Aditya Tikku ने कहा…

bhav aur shabdo ka sahraniy mishran

kajal ने कहा…

mastttt .......lajawab kya kahu i hv no word to say about ur .......................gud style of write poem.....

kajal ने कहा…

mastttt .......lajawab kya kahu i hv no word to say about ur .......................gud style of write poem.....

Praveen ने कहा…

ham apki agli post ka intjar kar rahe h..........

संजय भास्कर ने कहा…

मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

main... ratnakar ने कहा…

फिर भी जिंदा हूँ मैं और जियूंगी अभी

झूमके मै के प्याले पियूंगी अभी

अपनी पैनी नज़र से खुदा देख ले

मैं मुकद्दर की कतरन सियूंगी अभी।


मुझमे बाकी हैं साँसें अभी और भी

मुझको लिखनी हैं ग़ज़लें अभी और भी

ये तेरा नूर-ऐ-कुदरत सलामत रहे

मुझको गिनने हैं तारे अभी और भी



kamaal hai, aisa jazba aur shabd sansaar kaayam rakhiyega. bahut hee khoob likha hai aapne.

Chanchal ने कहा…

"mujhme baki hai saanse..."
its really amazing Charvi...
i knew ki tum bhut acha likhti ho but i dint have idea ki tum aisa bhi likh sakti ho.....
well done !!!
waiting 4 ur next poem....