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शनिवार, 1 जनवरी 2011

नव वर्ष


नए वर्ष की नूतन वेला
चीर तिमिर को हुआ सवेरा.

नव पल्लव, नव पुष्प सुगन्धित
करते प्रतिपल मन आह्लादित.

वसुंधरा कलरव से गुंजित
है नवीन अम्बर आच्छादित.

नव दिनकर का नव प्रभात है
नव सरिताएं, नव प्रपात हैं.

नई डोर है मन को थामे
नव आशाएं, नई उड़ानें.

नया साल खुशहाली लाये
हृदयों में आनंद समाये.

मिटें सभी दुःख की रेखाएं
भाग्योदय सत्कर्म कराएँ.

7 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता, आपका भी नववर्ष मंगलमय हो।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

नया साल खुशहाली लाये
हृदयों में आनंद समाये.

मिटें सभी दुःख की रेखाएं
भाग्योदय सत्कर्म कराएँ

सार्थक सबदेश देती नव वर्ष की आपकी पहली रचना ...
आपको नया साल बहुत बहुत मुबारक ...

राकेश कौशिक ने कहा…

सुंदर कविता के माध्यम से सच्चा और बहुत अच्छा सन्देश - आपको भी सपरिवार नव वर्ष की मंगल कामना

DR.MANISH KUMAR MISHRA ने कहा…

हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' -दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
प्रिय हिंदी ब्लॉगर बंधुओं ,
आप को सूचित करते हुवे हर्ष हो रहा है क़ि आगामी शैक्षणिक वर्ष २०११-२०१२ के जनवरी माह में २०-२१ जनवरी (शुक्रवार -शनिवार ) को ''हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' इस विषय पर दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है. विश्विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा इस संगोष्ठी को संपोषित किया जा सके इस सन्दर्भ में औपचारिकतायें पूरी की जा रही हैं. के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजन की जिम्मेदारी ली गयी है. महाविद्यालय के प्रबन्धन समिति ने संभावित संगोष्ठी के पूरे खर्च को उठाने की जिम्मेदारी ली है. यदि किसी कारणवश कतिपय संस्थानों से आर्थिक मदद नहीं मिल पाई तो भी यह आयोजन महाविद्यालय अपने खर्च पर करेगा.

संगोष्ठी की तारीख भी निश्चित हो गई है (२०-२१ जनवरी २०१२ ) संगोष्ठी में अभी पूरे साल भर का समय है ,लेकिन आप लोगों को अभी से सूचित करने के पीछे मेरा उद्देश्य यह है क़ि मैं संगोष्ठी के लिए आप लोगों से कुछ आलेख मंगा सकूं.
दरअसल संगोष्ठी के दिन उदघाटन समारोह में हिंदी ब्लागगिंग पर एक पुस्तक के लोकार्पण क़ी योजना भी है. आप लोगों द्वारा भेजे गए आलेखों को ही पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जायेगा . आप सभी से अनुरोध है क़ि आप अपने आलेख जल्द से जल्द भेजने क़ी कृपा करें .
आप सभी के सहयोग क़ी आवश्यकता है . अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें


डॉ. मनीष कुमार मिश्रा
के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय
गांधारी विलेज , पडघा रोड
कल्याण -पश्चिम
pin.421301
महाराष्ट्र
mo-09324790726
manishmuntazir@gmail.com
http://www.onlinehindijournal.blogspot.com/ http://kmagrawalcollege.org/

Dinesh pareek ने कहा…

कुछ लोग जीते जी इतिहास रच जाते हैं
कुछ लोग मर कर इतिहास बनाते हैं
और कुछ लोग जीते जी मार दिये जाते हैं
फिर इतिहास खुद उनसे बनता हैं
आशा है की आगे भी मुझे असे ही नई पोस्ट पढने को मिलेंगी
आपका ब्लॉग पसंद आया...इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी

कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-



बहुत मार्मिक रचना..बहुत सुन्दर...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

Aditya Tikku ने कहा…

bhut badiya -***

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता, आपका भी नववर्ष 2068 (samwatsar) मंगलमय हो।