
जीवन मे रिक्तता टटोलूं ,
रिक्त दिशा मे चलूँ कहीं पर ,
आज पुनः भावों की धो लूँ ,
जीवन मे रिक्ताता टटोलूं .
अंतर्मन के दीप बुझा कर ,
गहन निशा मे निर्विचार हो ,
एकाकी आनंद समेटूं ,
मानस के वातायन खोलूं .
जीवन मे रिक्तता टटोलूं .
ना कोई उन्मुक्त हास हो ,
ना ही कोई करुण रुदन हो ,
वक्रित ना हो मानस रेखा ,
चिर-निद्रा से जग कर सो लूँ .
जीवन मे रिक्तता टटोलूं .
परम शून्य आकार अटल हो ,
किन्तु शून्य वह निराकार हो ,
खुले नयन भी दृश्यहीन हों ,
आज न अपना भी स्वर बोलूं .
जीवन मे रिक्तता टटोलूं .