पृष्ठ

रविवार, 23 जून 2013

क्षणिकाएँ

तुम मेरी शख्सियत को यूँ पहचान लो
की मुझे शायरी का अदब जान लो
मैं हवा में परों से जो उडती दिखूं
तो मेरी आरज़ू की फ़तह मान लो.
******************************
वो जो सबकी शकल को दिखाया करे
इस हुनर से बड़ाई वो पाया करे
आइना न्याय करने के काबिल नहीं
पीठ की कालिखें जो छुपाया करे.
******************************
सबने मेले को खुशियाँ रवानी लिखा
ये खबर भी बड़ी थी इसे ना लिखा
जब खिलौने पे बच्चे का दिल आ गया
बाप की आँख में मुझको पानी दिखा.
******************************
आँख भी बंद है साँस भी रुक गयी
जिंदगी की वो सीधी छड़ी झुक गयी
आज बाबा की पगड़ी की सारी चमक
आपनी औलाद के हाथ से धुल गयी.

1 टिप्पणी:

Manu Tyagi ने कहा…

प्रिय ब्लागर
आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

welcome to Hindi blog reader