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सोमवार, 1 जून 2009


चाहिए थी रोशनी ज़्यादा ही ज़माने को
कुछ नहीं मिला तो मेरा दिल जला दिया .

ऐ ग़म तेरी वफ़ा का मैं शुक्रिया करुँ
इस जिंदगी की लाश को फिर से जिला दिया.

कोई नहीं है अपना ऐ ग़म सिवाय तेरे
निस्पंद सी थी आँखें तुने रुला दिया.

मंहगा थ वो ज़हर बहुत पीना था जो मुझे
पर दोस्तों ने मोल भाव कर दिला दिया.

दिल चाहता था मेरा दो पल सुकून के
खुदा ने ख्वाहिशों पे भी पहरा लगा दिया.

कितना बड़ा समंदर मेरे नसीब मे
अँखियों के किनारों ने मुझको बता दिया.

मैं कब्र मे थी जिस दिन आया खुदा ज़मीं पे
मैंने बदल के करवट मुह को फिर लिया.

25 टिप्‍पणियां:

shikha varshney ने कहा…

मैं कब्र मे थी जिस दिन आया खुदा ज़मीं पे
मैंने बदल के करवट मुह को फिर लिया
wah wah wah anshuja kya baat kahi hai...lajabab hamesha ki tarah..

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

चाहिए थी रोशनी ज़्यादा ही ज़माने को
कुछ नहीं मिला तो मेरा दिल जला दिया.

मँहगा था वो ज़हर बहुत पीना था जो मुझे
पर दोस्तों ने मोल-भाव कर दिला दिया.

ये दो शेर बता रहे हैं कि
शुरूआत अच्छी हो गई है!

स्वागत!
बधाई!
शुभकामनाएँ!

श्यामल सुमन ने कहा…

चाहिए थी रोशनी ज़्यादा ही ज़माने को
कुछ नहीं मिला तो मेरा दिल जला दिया

बहुत खूब। कहते हैं कि-

सारे चराग हमने लहू से जलाये हैं।
जुगनू पकड़ के घर में उजाला नहीं किया।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

ravikumarswarnkar ने कहा…

मैं कब्र मे थी जिस दिन आया खुदा ज़मीं पे
मैंने बदल के करवट, मुह को फिरा लिया

ठीकठाक शुरूआत....और ये लाईनें तो बेहतर

समय ने कहा…

काश ये तल्ख़ ज़िंदगी भी ऐसे ही करवट बदल कर मुंह फिरा लिया करती।

सुस्वागतम्...

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) ने कहा…

बहुत ही वेहतरीन शेर है उम्मीद है आगे भी एसे ही लिखती रहे गी मेरी शुभ कामनाये आप के साथ है
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है आपने । आपका शब्द संसार भाव, विचार और अभिव्यिक्ति के स्तर पर काफी प्रभावित करता है ।

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-फेल होने पर खत्म नहीं हो जाती जिंदगी-समय हो तो पढ़ें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

राजेंद्र माहेश्वरी ने कहा…

स्वागत!
बधाई!
शुभकामनाएँ!

plz remove word verification

Kavyadhara ने कहा…

बुद्धम शरणं गच्छामि................

दो पल सुख से सोना चाहे पर नींद नही पल को आए
जी मचले हैं बेचैनी से ,रूह ना जाने क्यों अकुलाए
ज्वाला सी जलती हैं तन मे ,उम्मीद हो रही हंगामी .....
बुद्धम शरणं गच्छामि................

मन कहता हैं सब छोड़ दूँ मैं पर जाने कैसे छुटेगा ये
लालच रोज़ बढ़ता जाता हैं लगती दरिया सी तपती रेत
जब पूरी होती एक अभिलाषा खुद पैदा हो जाती आगामी......
बुद्धम शरणं गच्छामि................

नयनो मे शूल से चुभते हैं, सपने जो अब तक कुवारें हैं
कण से छोटा हैं ये जीवन और थामे सागर कर हमारे हैं
पागल सी घूमती रहती हैं इस चाहत मे जिन्दगी बे-नामी........
बुद्धम शरणं गच्छामि................

ईश्वर हर लो मन से सारी मोह- माया जैसी बीमारी
लालच को दे दो एक कफ़न ,ईर्ष्या को बेवा की साड़ी
मैं चाहूँ बस मानव बनना ,मांगू एक कंठी हरि नामी ....
बुद्धम शरणं गच्छामि................

(सर्वाधिकार सुरक्षित @ कवि दीपक शर्मा )

http://kavyadhara-team.blogspot.com
http://shayardeepaksharma.blogspot.com
http://www.kavideepaksharma.co.in
http://www.kavideepaksharma.com

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मंहगा थ वो ज़हर बहुत पीना था जो मुझे
पर दोस्तों ने मोल भाव कर दिला दिया.

दिल चाहता था मेरा दो पल सुकून के
खुदा ने ख्वाहिशों पे भी पहरा लगा दिया.

वाह.......बहूत ही लाजवाब शेर कहे हैं आपने.........जिंदगी के रंगों को समेत कर लिखे शेर...........लिखते रहें

Abhi ने कहा…

Swagat hai,
Kabhi yahan bhi aayen
http://jabhi.blogspot.com

नारदमुनि ने कहा…

khub likha balike. narayan narayan

islamicwebdunia ने कहा…

हिंदी में इस्लामिक वेब

आनंदकृष्ण ने कहा…

आज आपका ब्लॉग देखा.... बहुत अच्छा लगा. मेरी कामना है कि आपके शब्दों को नये अर्थ, नयी ऊंचाइयां एयर नयी ऊर्जा मिले जिससे वे जन-सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति का सार्थक माध्यम बन सकें.
कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर पधारें-
http://www.hindi-nikash.blogspot.com

सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर
mobile : 09425800818

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

namaskar mitr,

aapki kavitayen padhi , sab ki sab behatreen hai .. aapki kavitao me jo bhaav hai ,wo bahut hi gahre hai ..

aapko badhai .. zindagi ke different shades ke upar likhi gayi ye kavita acchi lagi ..

dhanywad.

meri nayi kavita " tera chale jaana " aapke pyaar aur aashirwad ki raah dekh rahi hai .. aapse nivedan hai ki padhkar mera hausala badhayen..

http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/05/blog-post_18.html

aapka

Vijay

cartoonist anurag ने कहा…

behtareen rachana hai.

अक्षय-मन ने कहा…

अच्छा लिखा है उत्क्रष्ट रचना......

अक्षय-मन

gutkha ने कहा…

wow

psingh ने कहा…

बहुत खूब बेहतरीन ग़ज़ल

psingh ने कहा…

बहुत सुन्दर
बहुत बहुत आभार

swati ने कहा…

amazing charvi.. really amazing

niranjan ने कहा…

Nice work anshuja.keep it up.

संजय भास्कर ने कहा…

आप बहुत सुंदर लिखती हैं. भाव मन से उपजे मगर ये खूबसूरत बिम्ब सिर्फ आपके खजाने में ही हैं

संजय भास्कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

nirupam ने कहा…

behad sashakt bhav hain... badhaai.